एनबीएफसी के नकदी संकट से गिरावट आएगी: टू-व्हीलर और होम लोन में.

नई दिल्ली. नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) इन दिनों नकदी के संकट से जूझ रही हैं। यह स्थिति कम से कम और दो महीने तक बनी रह सकती है। इससे उनके द्वारा दिए जाने वाले होम लोन और ऑटो लोन पर असर पड़ने की आशंका है। इसका असर घरों और गाड़ियों की बिक्री पर भी हो सकता है। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा सिक्युरिटीज और स्विस ब्रोकरेज क्रेडिट सुईस ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में यह आशंका जताई है।

टू-व्हीलर्स की 25% बिक्री त्योहारों के दौरान होती है
दोपहिया वाहनों की फाइनेंसिंग में 60% हिस्सेदारी एनबीएफसी की है। साल में 25% दोपहिया वाहनों की बिक्री त्योहारों के दौरान होती है। इसलिए त्योहारों में दोपहिया वाहनों की बिक्री घट सकती है।
पिछले महीने आईएलएंडएफएस ग्रुप ने कर्ज लौटाने में 10 से ज्यादा डिफॉल्ट किया। इसके बाद बैंक एनबीएफसी को नया कर्ज देने में सावधानी बरत रहे हैं। इस वजह से उन्हें नकदी की समस्या हो गई है।
नोमुरा के मुताबिक नकदी संकट से होम लोन में एनबीएफसी की हिस्सेदारी और कम हो जाएगी। डेवलपर्स भी परेशान होंगे जो ज्यादा इन्वेंट्री की वजह से पहले ही दबाव में हैं।
क्रेडिट सुइस का कहना है कि एनबीएफसी में नकदी संकट से दोपहिया वाहनों की फाइनेंसिंग कम हो सकती है। फायदेमंद नहीं होने की वजह से कई बैंकों ने टू-व्हीलर्स के लिए लोन देना लगभग बंद कर दिया है।
टू-व्हीलर लोन सेगमेंट में एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2013-14 में 30% दोपहिया वाहन फाइनेंसिंग के जरिए बिके थे। 2017-18 में यह आंकड़ा 50% हो गया।
सस्ते घरों के लिए कर्ज में ज्यादा परेशानी होगी
विशेषज्ञों का कहना है कि हाउसिंग सेक्टर की एनबीएफसी में नकदी संकट से सस्ते घरों के लिए कर्ज में ज्यादा परेशानी होगी। एनबीएफसी आम तौर पर छोटे कर्ज देती हैं। इनके 60% होम लोन 10-15 लाख रुपए के हैं। बैंक इनमें ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं।

रिजर्व बैंक ने फाइनेंसिंग के नियम आसान किए
रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी को फाइनेंसिंग के नियम आसान किए हैं। बैंक इन्हें जो कर्ज देते हैं, उसका एक हिस्सा उन्हें रिजर्व रखना पड़ता है।

आरबीआई ने कहा है कि बैंक 19 अक्टूबर के बाद एनबीएफसी को जो नया कर्ज देंगे, उसके एवज में रिजर्व की प्रोविजनिंग सरकारी बॉन्ड से कर सकते हैं।
बैंकों को जमा राशि का कुछ हिस्सा सरकारी बॉन्ड और सोने में निवेश करना पड़ता है। इसे एसएलआर कहते हैं। अभी यह 19.5% है। रिजर्व बैंक के फैसले से बैंक एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को ज्यादा कर्ज दे सकेंगे।