आफत की बारिश : चक्रवात से देश के उत्तरी राज्यों में भारी नुकसान

इस साल उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से 10 गुना अधिक बारिश, हिमालय के ऊपरी हिस्से में भारी बर्फबारी और मानसून की वापसी में देरी हो रही है। मौसम विशेषज्ञ इसके लिए गुजरात के ऊपर बने पश्चिमी विक्षोभ के गहरे दबाव और ओडिशा के तट पर चक्रवात ‘दाय’ के कारण बने भारी दबाव को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

केवल शुक्रवार से सोमवार तक ही इस बार उत्तर-पश्चिमी भारत में इस अवधि की सामान्य बारिश से 454% अधिक बारिश हो चुकी है। इस अवधि की सबसे ज्यादा बारिश पंजाब में हुई जो सामान्य से 1,193% अधिक दर्ज की गई और पश्चिमी राजस्थान के लिए सबसे कम बारिश हुई, जो सामान्य से 317% अधिक रही।

मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक के.जे. रमेश ने कहा, ‘दाय’ चक्रवात के कारण बड़े पैमाने पर हवा का कम दबाव बना, जिसका विस्तार गुजरात तट तक हुआ। इसे और प्रोत्साहित किया अरब सागर से उठनेवाली पश्चिमी विक्षोभ ने और नमी को ऊपर में उत्तर की ओर धकेल दिया।

रमेश ने कहा, हालांकि, शुक्रवार की सुबह ओडिशा के गोपालपुर में आया चक्रवात ‘दाय’ पहले से ही काफी कमजोर हो चुका था। लेकिन तेलंगाना-कर्नाटक क्षेत्र से लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, दक्षिणी राजस्थान क्षेत्र तक ये हवाएं छाई रहीं जिसके कारण यहां भारी बारिश हुई। उत्तर में वैसे सामान्य बारिश होती है, लेकिन मजबूत पश्चिमी हवाओं ने चक्रवात ‘दाय’ से ऊपर-ऊपर ही नमी खींच ली, जिससे क्षेत्र को बारिश की ‘दोहरी खुराक’ मिल गई।

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इस स्थिति से तापमान में अचानक तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ऊपरी इलाकों में बर्फबारी हुई, जो सितंबर में बेहद असामान्य है। हिमाचल और लद्दाख के जनजातीय क्षेत्रों में रविवार को एक फीट तक बर्फबारी हुई जिससे स्थानीय किसानों के मुताबिक आलू और सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ। पंजाब और हरियाणा के बड़े हिस्सों में भारी बारिश ने धान की फसल को भी नुकसान हुआ है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के हिस्सों में भी ‘दाय’ से अतिरिक्त वर्षा नहीं हुई।‘दाय’ के कारण पैदा दबाव से न केवल उत्तर में बल्कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भी भारी बारिश दर्ज की गई है।

भारी बारिश क्यों

उत्तर भारत में भारी बारिश का मुख्य कारण मानसून के लौटने में देरी को माना जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि सप्ताह के अंत तक मानसूनी हवाएं यहां से विदा हो जाएंगी।

चक्रवात

‘दाय’ चक्रवात में ओडिशा के तट पर बने गहरे दबाव ने (उच्च नमी सामग्री) पूरे मध्य भारत में गुजरात और दक्षिण राजस्थान तक तथा तेलंगाना और कर्नाटक तक फैल गया।

कम दबाव

हवा में शक्तिहीनता के कारण भी भारी वर्षा हो जाती है। दक्षिण के आंध्र, तेलंगाना और कनार्टक में इसके कारण भारी बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।

पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ हवा के साथ अरब सागर से बड़ी मात्रा लाता है। इसके कारण दबाव उत्तर की ओर होने लगता है। इस कारण यहां हर महीने में भारी वर्षा होती है।

पंजाब कृषि विभाग के निदेशक जे.एस. बैन्स के अनुसार, गहराई वाले इलाकों में धान की खेती को भारी वर्षा के कारण काफी नुकसान पहुंचा है। हम नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

2 लाख एकड़ धान को नुकसान

पंजाब कृषि विभाग के निदेशक जेएस बैन्स ने कहा कि राज्य में दो लाख एकड़ तक में धान को नुकसान के बारे में बताया गया है। राज्य के कुल जोत के 1 से 3 फीसदी जमीन में (74.5 लाख एकड़) में धान की खेती होती है।

पूर्वानुमान

– पंजाब और हरियाणा में अगले तीन दिन तक बारिश नहीं होगी

– चंडीगढ़ में अगले तीन दिन बादल छाए रह सकते हैं, उसके बाद आसमान साफ रहेगा

– हिमाचल प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है

– पिछले कुछ दिनों से भारीाारिश से जूझ रहे हिमाचल को राहत की आस

– खरीफ की फसस को भी नुकसान पहुंचने की आशंका

दिल्ली के तीन ट्रैकर लापता

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में खराब मौसम के चलते दिल्ली और शिमला के छह ट्रैकर 21 सितंबर से कथित रूप से लापता हैं। पुलिस के अनुसार तीन ट्रैकर पुनीत, निखिल और आशुतोष शिमला जिले के जुब्बल इलाके के हैं। अन्य तीन दिल्ली के बताए जा रहे हैं।