बिहार से अपहृत डॉक्टर को मरा समझकर ट्रेन में चढ़ाया, वायरल कर दी फोटो

बिहार से अपहृत डॉक्टर उपेंद्र कुमार यादव इतने बेसुध हो गए कि वह हिलडुल तक नहीं पा रहे थे। उनकी हालत को देखकर बदमाशों को लगा कि डॉक्टर की मौत हो गई। ट्रेन में अचेत हालत में पड़े डॉक्टर का फोटो उनके करीबियों को व्हाट्सएप पर भेज दिया। यह भी लिखा कि युवक की मौत हो चुकी है।

सूचना पहुंचने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। ट्रेन में डॉक्टर के होने की बात पर पुलिस ने हरदोई, शाहजहांपुर और बरेली के आरपीएफ थानों को अलर्ट किया। रविवार शाम करीब पांच बजे बिहार के सीवान जिले के थाना मेरवा के गांव फरछुन्ना निवासी डॉ उपेंद्र यादव अपने विजयपुर मोड़ स्थित अस्पताल में मरीज देख रहे थे। डॉक्टर के चैम्बर में एक-एक कर मरीजों का आना-जाना हो रहा था। तभी कॉल आई। फोन करने वाले ने बाजार में बुलाया।

उपेंद्र को लगा कि कोई गंभीर बीमार है, जिसके चलते इमरजेंसी में उन्हें बुलाया गया। सारे मरीजों को छोड़कर वह चल दिए। पहले से उनका इंतजार कर रहे बदमाशों ने मुंह पर रुमाल झाड़ दिया, जिससे डॉक्टर पूरी तरह अचेत हो गए। डॉक्टर को नहीं पता कि उसके बाद क्या हुआ।टूटी-फूटी हिन्दी में लिखा मैसेजबात यहीं पर खत्म नहीं हुई। डॉक्टर को ट्रेन में सवार करा दिया गया।

अचेतअवस्था में उपेंद्र का फोन निकाल लिया। उसी से उनका फोटो भी क्लिक किया। व्हाट्सएप पर डॉक्टर का फोटो अटैच कर लिखा कि यह युवक दुनिया में नहीं रहा। युवक की बॉडी लखनऊ रेलवे प्लेटफॉर्म के बगल में मिला है। लंबा-चौड़े मैसेज के साथ अचेत अवस्था में पड़े डॉक्टर के फोटो को करीबियों के नंबर पर फॉरवर्ड कर दिया। रिश्तेदारों के पास मैसेज पहुंचने के बाद हड़कंप मच गया।

इस बीच पुलिस को परिजनों ने सूचना दी। लखनऊ जाने वाली ट्रेनन में होने की आशंका के चलते मैरवा थाने के इंचार्ज ने तुरन्त हरदोई, शाहजहांपुर आदि के जीआरपी थानों को पूरा मैसेज दिया। उसके बाद अलर्ट जारी किया। फोटो से मिलान कराने के बाद डॉ उपेंद्र की पहचान हुई। उनके परिजनों को सूचना देकर बुलवा लिया गया।

मरीजों की लगती थी भीड़, तभी फिरौती देकर कराया अपहरण

डॉक्टर उपेंद्र की उम्र 35 साल के आसपास है। उन्होंने बीएएमएस करा रखा है। डॉ उपेंद्र ने अपने छोटे से गांव में क्लीनिक खोल रखी है। दवा से लोगों को फायदा हुआ तो भीड़ लगनी शुरू हो गई। तब छोटे भाई चंदन पाल व मनीष यादव को भी कंपाउंडर बना लिया। उन्होंने कम समय में ज्यादा ख्याति अर्जित की। इसके बाद गांव से निकलकर शहर में क्लीनिक खोलने का मन बनाया। तीन किमी दूरी पर विजयपुर रोड पर साईं अस्पताल खोल लिया। सिर्फ आठ महीने में उनके अस्पताल में बड़ी तादाद में मरीजों का आना शुरू हो गया। जिसके चलते आसपास के डॉक्टरों की क्लीनिक पर सन्नाटा छाने लगा। आरपीएफ थाने पर बैठे डॉ उपेंद्र ने अपनी कोई रंजिश होने से इंकार कर दिया। बोले कि हमारी व्यक्तिगत किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। लेकिन, जहां भी बैठे, दूसरे डॉक्टरों की हालत पतली हो गई। उन्होंने स्वीकार किया कि आसपास के दुकानदारों ने उनकी फिरौती देकर अपहरण कराया है।

मचा था कोहराम, फोन पहुंचते ही छा गई खुशी

उपेंद्र के लापता होने के बाद परिवार वाले काफी परेशान थे, पर जब व्हाट्सएप पर फोटो और मरने की सूचना पहुंची तो मां अनीता देवी, बहन पूनम, सुमन कुमारी व भाई बिलख पड़ीं। रिश्तेदार भी रोते-बिलखते हुए घर पहुंच गए। पूरे घर में मातम छा गया। पिता को लोग सांत्वना देने लगे। वहीं दूसरी तरफ आरपीएफ के एसआई नरवीर सिंह व हेड कांस्टेबल वीरभद्र सिंह को डॉ उपेंद्र मिल गए। उनका मुंह धुलवाया।

थोड़ा आराम मिलने पर डॉक्टर ने अपने परिजनों को फोन किया। फोन पर उपेंद्र की आवाज सुनकर पूरे परिवार में खुशी छा गई। बहनें दौड़ते हुई मंदिर तक जा पहुंचीं और धन्यवाद देने के लिए भगवान की मूर्ति के सामने दीया जलाया। शाहजहांपुर में होने की बात सुनने के बाद उपेंद्र के पिता बनवारी लाल अपने रिश्तेदारों के साथ बेटे को लेने के लिए चल पड़े हैं।

विधायक से भी बात हुई

होश आने के बाद डॉ उपेंद्र ने अपने करीबी विधायक रमेश कुशवाहा से फोन पर बात की। उन्हें पूरी बात भी बताई। विधायक ने उनसे यह कहा कि वह जल्दी वापस लौट आएं। उपेंद्र की राजनीति में भी रुचि है।

आरपीएफ ने दिखाई तेजी, कर लिया बरामद

बिहार के मैरवा थाने के इंस्पेक्टर ने लखनऊ से आगे वाले आरपीएफ थानों को सूचना दी थी। उन्होंने व्हाट्सएप पर फोटो भी भेजी थी। कंपनी कमांडर वीके सिंह ने स्टाफ को अलर्ट किया। गरीब नवाज एक्सप्रेस के रवाना होने के बाद डॉ उपेंद्र एसआई नरवीर सिंह और हेड कांस्टेबल वीर भद्र को मिल गए। उनके फोटो का मिलान कराया। परिजनों को सूचना देने के साथ-साथ अपनी बैरक में सुलाया। नरवीर सिंह ने बताया कि उपेंद्र को उनके परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।बाक्स नंबर5कुछ ले नहीं गए बदमाशडॉक्टर के दोनों फोन उनके पास हैं। पर्स भी सुरक्षित है। दूसरे कागजात भी मिल गए हैं। माना जा रहा है कि बदमाश डॉक्टर को मृत समझकर ट्रेन में सवार करा दिए। जिससे वह कहीं दूर निकल जाए।