PM मोदी का ‘पॉलिटिकल ईगो’ पटेल की मूर्ति दिखाती है: विदेशी मीडिया

देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण बुधवार को उनकी 143वीं जयंती पर हो रहा है. आजादी के बाद सैकड़ों रियासतो में बंटे भारत का एकीकरण करने वाले लौह पुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के ऐतिहासिक अनावरण को दुनिया भर की मीडिया की भी नजर है.

विदेशी मीडिया में इस प्रतिमा के अनावरण की तारीफ और आलोचना दोनो हुई है. कुछ संस्थानों का कहना है कि यह ”भारत की समृद्धि को दिखाता है”, तो कुछ विदेशी मीडिया ने इसे ”बीजेपी द्वारा एक लोकप्रिय नेता विरासत को हड़पने का प्रयास” करार दिया है. गणतंत्र दिवस की तर्ज पर सरदार पटेल के जन्मदिवस के उत्सव का आयोजन किया गया है, इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 182 मीटर ऊंची प्रतिमा का अनावरण करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थें उस दौरान अक्टूबर 2013 में उन्होंने 2,989 करोड़ रुपये की लागत से नर्मदा के तट पर बनने वाली इस प्रतिमा की नींव रखी. हालांकि इस इलाके में रहने वाले किसान और आदिवासी इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण से नाराज हैं और पटेल का जन्मदिवस ”काला दिवस” के तौर पर मना रहे हैं.

अमेरिकी मीडिया

वाशिंग्टन पोस्ट के मुताबिक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी- “भारत को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होने शेखी झाड़ने का अधिकार देगा-600 फिट ऊंची यह प्रतिमा भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा के साथ-साथ इसके नेता के ‘पॉलिटिकल ईगो’ के बारे में भी बताता है.” लेख में आगे कहा गया, “माना जा रहा है कि इस प्रतिमा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन मोर्चों पर जीत हासिल होगी: अपने हिंदू राजनीतिक आधार की स्वीकृति, अपने गृह राज्य में एक ऐतिहासिक स्थल और बढ़ते वैश्विक शक्ती के रूप में पहचान.”

अमेरिकी मीडिया में इस प्रतिमा के अनावरण को अनौपचारिक तौर पर बीजेपी द्वारा 2019 के आम चुनावों के प्रचार की शुरूआत बताया गया है.

पाकिस्तान मीडिया

पाकिस्तानी अखबार एक्प्रेस ट्रब्यून के मुताबिक, “यह प्रतिमा पीएम मोदी की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा लोकप्रीय राष्ट्रीय नेता को हथियाने की मिसाल, क्योंकि पटेल कांग्रेस के नेता थें जो इस समय भारतीय संसद में बीजेपी के विपक्ष में बैठती है.” जियो न्यूज कहा कि यह भारत में “राष्ट्रवादी उत्साह का एक विस्फोट है”, ऐसे समय जब भारत में अगले साल आम चुनाव होने हैं तो इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे राजनीतिक उद्देश्य भी है.

चीनी मीडिया

साउथ चाइना पोस्ट ने एएफपी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है, “मुंबई के समुद्र तट पर बनने वाली छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा बहुत जल्द ही दुनिया की इस सबसे बड़ी प्रतिमा को मात दे देगी.” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट अलग-थलग पड़े सरदार सरोवर बांध की अनदेखी भी करता है.

ब्रिटिश मीडिया

बीबीसी ने स्थानीय किसानों की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुए एक किसान के हवाले से लिखा, “इतनी बड़ी प्रतिमा पर धन खर्च करने के बजाय सरकार को यह पैसा आस-पास के किसानों के कल्याण के लिए इस्तेमाल करना चाहिए.” बीबीसी के लेख में 2016 के सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि नर्मदा जिला उन निवासियों का घर है जो भूखे पेट जिंदगी गुजार रहे हैं, प्राइमरी स्कूलों में दाखिला लेने वालों की संख्या गिर रही है और इलाके में कुपोषण चरम पर है.