नवरात्रि 2018 : नारी सम्मान की 9 बड़ी सीख देते हैं, शक्ति के 9 स्वरूप,

नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। यह नारी शक्ति के आदर और सम्मान का उत्सव है। यह उत्सव नारी को अपने स्वाभिमान व अपनी शक्ति का स्मरण दिलाता है, साथ ही समाज के अन्य पुरोधाओं को भी नारी शक्ति का सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है। जिस तरह हम नवरात्रि में मातृशक्ति के नौ रूपों का पूजन करते हैं, उनका स्मरण करते हैं, उसी प्रकार नारी के गुणों का हम सम्मान करें। हमारे घर में रहने वाली माता, पत्नी, बेटी, बहन- इन सब में हम गुण ढूंढें।

नारी पूजनीय ही नहीं, सृजन की देवी
भारतीय समाज में नारी को देवी शक्ति के रूप में माना गया है। हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी नारी को पूजनीय बताया है। भगवान ने भी नारी को एक जननी के रूप में सम्मान देकर इस धरती पर भेजा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य नारी पर टिका होता है। एक मां (नारी) जिस तरह से अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं। संस्कारित करती हैं, ऐसे बच्चे के राष्ट्र के कर्णधार के रूप में पहचाने जाते हैं। अर्थात् राष्ट्र को ऊंचा उठाने में नर के साथ नारी की भूमिका को कमतर नहीं आंकी जा सकती। प्राचीनकाल की सीता, अनुसूया, अपाला, घोषा, सरस्वति, सर्पराज्ञी, सूर्या, सावित्री, अदिति, दाक्षायणि, लोपामुद्रा, विश्ववारा, आत्रेयी आदि ऋषिकाओं ने वह कर दिखाया, जो जिसका गान करते हुए ऋषि थकते नहीं थे। इस नवरात्र से नारी के सम्मान करने के लिए स्वयं से शुरुआत करने एवं अपने परिजन, साथियों को प्रेरित करने के उत्सव में मनाने चाहिए।

शक्ति के 9 रूप – 9 प्रेरणा
निश्चित रूप से भगवान शिव के लिए आदर का भाव रखने वाली माता शैलपुत्री से आज के समाज को सीखने की जरूरत है। मां ब्रह्मचारिणी को पर्वत हिमवान की बेटी कहा जाता है। आज प्रायः हर घर में कलह और द्वेष का माहौल है। लोग एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहते है। ऐसे अशांत मन वाले भक्तों के मन में शांति और तप भाव का संचार करें। हिम्मत और साहस का रूप माता चंद्रघंटा इस नवरात्र में अपने भक्तों का कल्याण करें, जिससे वह सही रास्ते पर चल सके। माता कुष्माडा संसार मे फैले अंधेरे को अपने प्रकाश से प्रकाशमय कर दें, ताकि भक्तों का कल्याण हो सके। उनके द्वारा प्रदप्त शक्ति ही हमें मुक्ति, भक्ति दोनों प्रदान करती है। हम उपासना के साथ नारियों के सम्मान का संकल्प लें। स्कन्दमाता समाज में चारों ओर फैले अंध विश्वास को हरने वाली है। उनसे प्रार्थना करें कि वे रुढ़िवादिता को उबरने हेतु हमें शक्ति व साहस दें। शेर की सवारी करने वाली कात्यायनी मां समाज में पापियों की संंख्या को घटाने मे काम करने वालों को संबल दे। जिससे समाज में अराजकता, भ्रष्टाचारी कम हो। शुभ कुमारी के रूप में पूजे जाने वाली माता कालरात्रि से दुर्व्यसनों, नशाखोरी, चोरी, डकैती आदि में लिप्त लोगों के मन को सही दिशा देने हुए विनती करें। इस नवरात्रि भूत व भविष्य के पापों को धोने वाली माता महागौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, ताकि हम मन स्वच्छ हो सके और वह नेक रास्ते पर चल सके। माता सिद्धिदात्री की पूजा नौवें दिन की जाती है। इनकी पूजा करने से माता किसी को निराश नहीं करती हैं। उम्मीद है माता के भक्त भी इस नवरात्रि पर प्रतिज्ञा लेंगे कि वह सही रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।

माता की उपासना एवं तदनुसार संकल्पपूर्वक कार्य करने से ही समाज में नारी शक्ति सम्मान के साथ आगे बढ़ पायेंगी। नवरात्रि के नौ दिन में सर्वशक्तिमान माता से प्रार्थना करें कि हमारी बुद्धि को बलपूर्वक सही दिशा दें। नारी के सम्मान के इस पर्व को उत्सव के साथ मनाने एवं नारी को सतत आगे बढ़ने में सहयोग करने के संकल्प के साथ मनाना चाहिए।