गरबे पर चढ़ा सेल्फी का रंग

अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव के चौथे दिन आस्था और उत्साह चरम दोनों दिखा। 5 दिनी इस पर्व के चौथे दिन रविवार को बिगुल की आवाज सुनते ही प्रतिभागी सचेत हो गए। नई स्मृतियों को संजोने के लिए तैयार प्रतिभागी का उत्साह और जज़्बा उनकी परफॉर्मेंस में दिखाई दी। गुजराती इंग्लिश मीडियम स्कूल मैदान में हजारों गरबाप्रेमियों ने एक साथ कदम ताल मिलाते हुए गरबा किया। ट्रेडिशनल गुजराती और बॉलीवुड गरबा गीतों पर गरबा, और हीच ताली की प्रस्तुतियां देखते ही बनीं, जितना उत्साह प्रतिभागियों में था उससे कई ज्यादा उत्साह जनरल सर्कल में गरबा करते हजारों नागरिकों में नज़र आया। यहां ब्रेक मिलते ही सेल्फी का क्रेज भी दिखा।
चौथे दिन पार्टिसिपेंट्स अपनी अलग पहचान बनाने खुद को दूसरों से बेहतर दिखाने के लिए अपना स्टाइल सेट कर गरबा खेलने पहुंचे। महाआरती के बाद जैसे ही गरबों का दौर शुरू हुआ वैसे ही जनरल व पार्टिसिपेंट दोनों ही सर्कल में गरबाप्रेमी थिरकने लगे।
प्रतिभागी में इस बार सभी राज्यों की संस्कृति देखने को मिली। गरबे के दौरान काठियावाड़ी, राजस्थानी, गुजराती ड्रेसेस का फ्यूज़न और केड़िया ड्रेसेस खूब देखने को मिली। गरबा करने आए निखिल ने बताया कि खासतौर पर गुजरात से काठियावाड़ी केड़िया ड्रेस मंगाई है। साफे में कौड़ियों का काम है। कानों में इयरकफ्स पहने हैं जो राजस्थानी लुक देते हैं।
पार्टिसिपेंट्स इस बार भी अलग-अलग थीम में नजर आए। लड़कियां गुजराती ट्रेडिशनल ड्रेसेस केड़िया में नजर आईं। लड़के भी पूरी तैयारी के साथ करने आए। इन्होंने प्रॉप्स में अम्ब्रेला और कार्डबोर्ड पर सोशल मैसेज लिख कर संदेश दिया। हजारों की भीड़ से खुद को अलग दिखाने के लिए आम पब्लिक भी अलग-अलग गेटअप में आए। कमरिया रे थारी कमरिया, ढोलिड़ा, मोहे रंग दो लाल जैसे सॉन्ग्स पर भी गरबा किया। लाइव सॉन्ग के साथ ही आरजे और एंकर ने समा बनाए रखा।

गरबे के साथ-साथ सेल्फी का जादू भी यहां लोगों के सिर चढ़कर बोला। गरबा कर रहीं लड़कियां मौका मिलते ही मोबाइल निकालकर सेल्फी लेती नजर आईं। पार्टिसिपेंट्स के साथ ही सर्कल के बाहर खड़े लोग भी छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर गरबा करते दिखे। गरबा करते समय लड़कों ने अपने मोबाइल जैकेट या कुर्ते की जेब में रख लिए तो लड़कियां कमर में मोबाइल फंसाकर गरबा करती रहीं। सर्कल के बाहर खड़े दर्शक भी गरबा कलाकारों के साथ सेल्फी लेते नजर आए। अलग-अलग ड्रेसअप और मेकअप में आए कलाकारों के साथ बच्चों ने भी शौक से सेल्फी ली और फोटोज भी बनाए।

संस्कृति और परम्परा के साथ अभिव्यक्ति स्वाद का उत्सव भी है। यहां फूड ज़ोन में वो ज़ायके परोसे जा रहे हैं जो देशभर में मशहूर हैं। पंजाब के छोले कुलछे, जुहू चौपाटी की पावभाजी, राजस्थानी दाल-बाटी चूरमा, आगरा की साग-पूड़ी… ब्रेक के बाद सारे प्रतिभागी यहीं नज़र आते हैं। फूड ज़ोन में पिज्ज़ाब्र, सैंडविच और चाइनीज़ के कॉन्टिनेंटल क्विज़ीन भी हैं और उपवास वालों के लिए फलाहारी भी है और इन ज़ायकों का लुत्फ और बढ़ जाता है जब ज़मीन पर घेरा बनाकर सब दोस्त बैठ जाते हैं। आंच पर चढ़े कढ़ाव उकलते दूध की महक आती रहती है। गरबा खत्म होने के बाद दूध और कुल्हड़ की चाय के स्टॉल पर सबसे ज्यादा भीड़ लगती है। बतियाते हुए चाय की चुस्कियां लेते हैं और फिर लौट जाते हैं।