आज एकादशी व्रत, पितरों को मिलता है मोक्ष, जानें व्रत विधि, कथा और पारण का समय

पितृपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी या श्राद्ध पक्ष एकादशी कहते हैं। पितृपक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। माना जाता है कि यदि कोई पूर्वज जाने-अनजाने में हुए पाप कर्मों के कारण दंड भोग रहा होता हैतो इस दिन विधिपूर्वक व्रत कर उनके नाम से दान करें तो पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। इस साल यह 5 अक्टूबर को है।

इंदिरा एकादशी व्रत विधि

यह व्रत एकादशी के एक दिन पहले यानी दशमी को शुरू होता है। इस रात भोजन नहीं किया जाता। इस दिन अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। फलाहार लेकर व्रत रख सकते हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। उसके बाद भगवान विष्णु के आगे घी का दीप प्रज्जवलित करें। ईश्वर का ध्यान लगाकर भजन, चालीसा और आरती कर पूजा करें। एकादशी के व्रत का पारण एकादशी के अगले दिन सुबह किया जाता है।

लेकिन व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि में पारण न किया जाए तो व्रत का फल व्रती को नहीं मिलता।

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इंदिरा एकादशी की कथा

महिष्मतीपुरी के एक राजा थे इन्द्रसेन। धर्मपूर्वक प्रजा के उद्धार के लिए कार्य करते थे साथ ही हरि भक्त भी थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में आए। राजा ने बहुत प्रसन्न हो उनकी सेवा की और आने का कारण पूछा। देवर्षि ने बताया कि मैं यम से मिलने यमलोक गया, वहां मैंने तुम्हारे पिता को देखा।

उन्होंने बताया कि व्रतभंग होने के दोष से वो यमलोक की यातनाएं झेलने को मजबूर है। इसलिए उन्होंने तुम्हारे लिए यह संदेश भेजा है कि तुम उनके लिए इन्दिरा एकादशी का व्रत करो। ताकि वो स्वर्गलोक को प्राप्त कर सकें।

राजा ने पूछा- कृपा करके इंदिरा एकादशी के संदर्भ में बताएं। देवर्षि ने बताया कि आश्विन मास की यह एकादशी पितरों को सद्गति देने वाली है। व्रत में अपना पूरा दिन नियम-संयम के साथ बिताएं। व्रती को इस दिन आलस्य त्याग कर भजन करना चाहिए। पितरों का भोजन निकाल कर गाय को खिलाएं। फिर भाई-बन्धु, नाती और पु्त्र आदि को खिलाकर स्वयं भी मौन धारण कर भोजन करना। इस विधि से व्रत करने से आपके पिता की सद्गति होगी।

राजा ने इसी प्रकार इंदिरा एकादशी का व्रत किया। व्रत के फल से राजा के पिता को हमेशा के लिए बैकुण्ठ धाम का वास मिला और राजा भी मृत्योपरांत स्वर्गलोक गए।

इंदिरा एकादशी पारण समय: 6 अक्टूबर सुबह 6:24 से 8:44 मिनट
एकादशी प्रारम्भ: 4 अक्टूबर रात 9:49 मिनट
एकादशी समाप्त: 5 अक्टूबर शाम 7:18 मिनट

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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