किसानों का आंदोलन खत्म, कहा- मानी गई ज्यादातर मांगें

उत्तर प्रदश सीमा पर एक दिन पहले मचे बवाल के एक दिन बाद हजारों की तादाद में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आए किसानों ने अपनी किसान क्रांति पदयात्रा खत्म करने का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी ज्यादतर मांगें सरकार ने मान ली है।

डीसीपी (ईस्ट) पंकज सिंह ने बताया- करीब पांच हजार किसानों को आधी रात दिल्ली में अंदर आने की इजाजत दी गई। वे सभी निर्धारित जगह किसान घाट पहुंचे और सुबह छह बजे तक वहां से वापस अपने घर लौट गए।

इससे पहले, मंगलवार की सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दिल्ली-यूपी गेट के पास एनएच-24 पर राजधानी के अंदर दिल्ली पुलिस से इजाजत नहीं मिलने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों और सुरक्षाबलों में हुई हिंसक झड़प हुई। इस घटना में पुलिसकर्मी और किसान समेत करीब 20 लोग घायल हुए।

 किसान प्रदर्शन: सरकार से चार दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी बात

इस दौरान पुलिस ने हजारों की तादाद में जुटे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उनके ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें की। जबकि, दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी पुलिस की तरफ से लगाए गए बैरिकेड्स को हटाकर जबरदस्ती सीमा के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करते रहे।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के बैनर तले किसानों की तरफ से किसान क्रांति मार्च की शुरुआत उत्तराखंड के हरिद्वार से 23 सितंबर को शुरू की गई और ये लोग पैदल, ट्रैक्टर्स और निजी गाड़ियों के साथ मंगलवार को दिल्ली सीमा के पास पहुंचे थे।

फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने, बिना शर्त ऋण माफी, बिजली और डीजल की कीमतों में कटौती, गन्ना के बकाया भुगतान समेत इनकी कुल 15 मांगें थी। समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, किसानों ने बताया कि वह सरकार के साथ हुए उनके समझौते में फसल कीमत बढ़ाने समेत ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं।