सरकार ने बनाई रणनीति सत्यम कंप्यूटर्स की तरह आईएलएंडएफएस को बचाने उतरी

केंद्र ने कर्ज में दबी और पूंजी के संकट से जूझ रही इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) को बचाने के लिए सत्यम कंप्यूटर्स की तरह उपाय अपनाए हैं। केंद्र ने आईएलएंडएफएस को नियंत्रण में लेने के लिए सोमवार को ही याचिका दी, जिसे एनसीएलटी ने मंजूर कर लिया।

इसके बाद आईएलएंडएफएस के निदेशक मंडल को बर्खास्त कर छह सदस्यीय नया बोर्ड गठित किया गया है। बोर्ड 15 अक्तूबर तक कंपनी के पुनरोद्धार का खाका एनसीएलटी के समक्ष पेश करेगा और ट्रिब्यूनल 31 अक्तूबर को इस पर सुनवाई करेगी। एनसीएलटी ने सोमवार को अंतरिम आदेश में कहा कि मौजूदा बोर्ड का कोई सदस्य कंपनी के किसी भी फोरम में प्रतिनिधित्व नहीं करेगा। सरकार ने कंपनी के बोर्ड एवं प्रबंधन नियंत्रण में बदलाव की मांग की थी, जिसके बाद एनसीएलटी ने यह फैसला दिया। गौरतलब है कि आईएलएंडएफएस के डूबने का म्यूचुअल फंड सेक्टर पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कर्ज में फंसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी आईएलएंडएफएस के लिए आवश्यक पैसे का प्रबंध सुनिश्चित करने को केंद्र प्रतिबद्ध है ताकि कंपनी को अब आगे किसी अन्य कर्ज का भुगतान करने में चूक नहीं करनी पड़े।

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इससे पहले सोमवार सुबर कारपोरेट मामलों के मंत्रालय में संयुक्त विधि निदेशक संजय शोरे ने एनसीएलटी के समक्ष आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि आईएलएंडएफएस को डूबने से बचाने के लिए वह कंपनी के बोर्ड में दस निदेशकों की नियुक्ति करना चाहती है। शोरे ने भरोसा दिलाया कि कंपनी के पुनरोद्धार के लिए नई पूंजी दी जाएगी।

उदय कोटक और जीएन बाजपेयी बोर्ड में
नए बोर्ड में कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक, सेबी के पूर्व अध्यक्ष जीएन बाजपेयी, आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन जीसी चतुर्वेदी शामिल हैं। इसके अलावा, पूर्व आईएएस मालिनी शंकर और विनीत नैय्यर और पूर्व लेखा परीक्षक नंदकिशोर भी बोर्ड में होंगे। बोर्ड नए चेयरमैन का ऐलान आठ अक्तूबर को करेगा। नया बोर्ड आईएलएंडएफएस की शाखाओं के निदेशक मंडल में भी बदलाव कर सकेगा।

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धोखाधड़ी की जांच भी करेगा एसएफआईओ
संयुक्त विधि निदेशक संजय शोरे ने कहा कि सच्चाई जानते हुए भी सीईओ और सीएफओ के साथ रवि पार्थसारथी कंपनी की चमकदार तस्वीर पेश करते रहे। विशेष धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।

2009 में सत्यम घोटाले ने तहलका मचाया था
सत्यम घोटाले ने 2009 में तहलका मचाया था, जब उनके अध्यक्ष रामलिंगा राजू ने स्वीकार किया था कि उन्होंने कंपनी की खराब हालत की सच्चाई चिफाई थी। इसके बाद कंपनी लॉ बोर्ड ने सत्यम के नियंत्रण को हाथ में लिया था। एचडीएफसी के दीपक पारेख, नासकॉम प्रमुख किरण कार्निक समेत कई हस्तियों को सत्यम के नए बोर्ड में जगह दी गई।