भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने लगातार दूसरी बार सोमवार को चालू विपणन वर्ष 2018-19 के लिए चीनी उत्पादन अनुमान को कम कर 3.07 करोड़ टन किया….

भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने लगातार दूसरी बार सोमवार को चालू विपणन वर्ष 2018-19 के लिए चीनी उत्पादन अनुमान को कम कर 3.07 करोड़ टन किया है। इसकी वजह चीनी के बजाय एथेनॉल का उत्पादन बढ़ना बताया जा रहा है।

इस्मा ने जुलाई 2018 में चालू विपणन सत्र के दौरान 3.5 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था। यह आंकड़ा चीनी उत्पादन का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इससे पिछले वर्ष देश में 3.25 करोड़ टन चीनी उत्पादन हुआ था। हालांकि, कुछ राज्यों में बेमौसम वर्षा और कीट हमले को ध्यान में रखते हुए बाद में पिछले साल के अक्तूबर में इस अनुमान को घटाकर 3.15 करोड़ टन कर दिया गया था। निर्यात के बारे में, इस्मा ने कहा कि यह मौजूदा विपणन वर्ष (अक्तूबर-सितंबर) में 30 से 35 लाख टन तक हो सकता है। हालांकि, सरकार ने वर्ष के दौरान 50 लाख टन चीनी निर्यात कोटा तय किया है। संगठन ने कहा है कि निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे। दिसंबर 2018 तक गन्ने का बकाया 19,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

1.46 लाख टन चीनी का उत्पादन
चालू विपणन वर्ष में 15 जनवरी तक चीनी मिलों ने एक करोड़ 46 लाख टन चीनी का उत्पादन किया, जो कि एक साल पहले इसी अवधि में एक करोड़ 35 लाख टन था। इस्मा ने कहा कि देश में चीनी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों ने 41.9 लाख टन चीनी का उत्पादन किया, जबकि महाराष्ट्र ने 57.2 लाख टन और कर्नाटक ने इस वर्ष 15 जनवरी तक 26.7 लाख टन चीनी उत्पादन किया।