पांचों मेयर और 110 में 63 पार्षद भाजपा के, हुड्‌डा-कुलदीप के वार्ड में भी हारी कांग्रेस

पानीपत। 5 नगर निगम (पानीपत, करनाल, हिसार, रोहतक, यमुनानगर) में पहली बार हुए मेयर के डायरेक्ट चुनाव में भाजपा ने क्लीन स्वीप कर दिया है। पार्टी के सभी मेयर प्रत्याशी विजयी रहे। पानीपत में अवनीत कौर सर्वाधिक 74,940 वोट के अंतर से जीतीं। 25 साल 9 माह की अवनीत इस बार की सबसे युवा व हरियाणा की दूसरी सबसे कम उम्र की महिला मेयर हैं।

इनसे पहले 2013 में रोहतक में रेनू डाबला 25 साल 7 माह की उम्र में मेयर चुनी गई थीं। इन पांचों निगमों में दूसरी बार हुए चुनावों में 110 वार्डों में से 63 पार्षद भाजपा के बने हैं। पानीपत में 26 में से 22 वार्डों में जीत दर्ज की। रोहतक में कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा व हिसार में कुलदीप बिश्नोई का जिन वार्डों में घर है, उनमें भी भाजपा जीती। साथ ही पानीपत, करनाल, यमुनानगर में विधानसभा चुनाव की तरह इन चुनावों में भी दबदबा कायम रखा।

इस बार नोटा स्थायी प्रत्याशी के रूप में ताकतवर था। 25 मेयर उम्मीदवार नोटा से भी कम वोट पा सके। 3 बड़े राज्यों (राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़) में सत्ता जाने के बाद हरियाणा के नतीजों से भाजपा को संजीवनी मिली है। वहीं, हुड्‌डा ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।

पानीपत
अवनीत कौर (25), वोट: 1,26321
शिक्षा: कंपनी सेक्रेटरी, फाउंडेशन एक्जीक्यूटिव
अंशु कौर पाहवा 51,381 (कांग्रेस समर्थित)
जीत का अंतर 74,940 वोट

करनाल
रेणु बाला
(48 वर्ष) वोट: 69,960 शिक्षा : बी.ए.
आशा वधवा 60,612 (इनेलो-बसपा व कांग्रेस समर्थित)
जीत का अंतर 9,348 वोट

हिसार
गौतम सरदाना
(44 वर्ष) वोट: 68,196 शिक्षा : बी.कॉम
खा ऐरन 40,105 (कांग्रेस समर्थित)
जीत का अंतर 28,091 वोट

रोहतक
मनमोहन गोयल (67) वोट: 65,822 शिक्षा: बी.ए.
सीताराम सचदेवा 51,040
(कांग्रेस समर्थित)
जीत का अंतर 14,776 वोट

यमुनानगर
मदन चौहान
(52 वर्ष) वोट: 91,642 शिक्षा : 10वीं
राकेश शर्मा 50,964 (कांग्रेस समर्थित)
जीत का अंतर 40,678 वोट

भाजपा की जीत के 3 बड़े कारण

1. मेयर के डायरेक्ट चुनाव
अब तक पार्षदों से मेयर चुना जाता था। इसमें अविश्वास प्रस्ताव का भय दिखाकर योजनाओं में भ्रष्टाचार किया जाता था। विकास कार्य बाधित होते थे। सरकार ने पहली बार जनता को मेयर चुनने का मौका दिया। इससे मेयर पर पार्षदों का दबाव नहीं होगा। भ्रष्टाचार में कमी आएगी। जनता में इसका अच्छा मैसेज गया।

2. सिंबल पर चुनाव लड़ना

भाजपा ने मेयर के साथ पार्षद चुनाव भी सिंबल पर लड़े। इससे यह संदेश देने में कामयाब रही कि वह जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं चाहती। एक निशान होने से घर-घर प्रचार हुआ। वहीं, इनेलो-बसपा गठबंधन ने 4 जिलों में मेयर प्रत्याशी उतारे। पर करनाल में निर्दलीय को समर्थन दिया। कांग्रेस भी साथ आ गई। लोगों में गठजोड़ का मैसेज गया।

3. विपक्ष की टूट-फूट

भाजपा ने समीकरण देखकर टिकट दिए। उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की घोषणा से दो दिन पहले तक सिंबल पर लड़ने की बात कहते रहे, लेकिन पार्टी ने उम्मीदवारों को समर्थन दिया, चिन्ह नहीं। वहीं, इनेलो हाल में दो फाड़ हुई है। विपक्ष की एक होकर भाजपा को घेरने की रणनीति फेल रही।

इस सफलता के 3 बड़े सियासी मायने
1. जीटी बेल्ट में मजबूत पकड़
2014 में भाजपा को हरियाणा की सत्ता तक पहुंचाने में जीटी बेल्ट का अहम रोल रहा। अब इन चुनावों में यमुनानगर, करनाल व पानीपत में जीतकर इस बेल्ट में दबदबा कायम रखा है। भाजपा ने रोहतक, हिसार, पानीपत में कांग्रेस और यमुनानगर में इनेलो से मेयर की कुर्सी छीनी है। करनाल में भाजपा मेयर रिपीट हुई हैं।

2. शहरी भाजपा के साथ
रोहतक कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा, दीपेंद्र हुड्‌डा, हिसार कुलदीप बिश्नोई, सावित्री जिंदल, यमुनानगर कुमारी सैलजा के गढ़ माने जाते हैं। वहीं, हिसार इनेलो का भी गढ़ है। इसके बावजूद यहां भाजपा ने जीत दर्ज कर साबित कर दिया कि शहरी मतदाता अब भी उसके साथ हैं।

3. सीएम ने दिखाई ताकत
सीएम मनोहर लाल ने खुद मोर्चा संभाल रखा था। इस बड़ी जीत से उन्होंने अपनी ताकत दिखा दी। अब उन्हें मेयर के जरिए योजनाएं जनता तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। वहीं, हार को लेकर विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप शुरू होंगे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा है कि सिंबल पर लड़ते तो नतीजे कुछ और होते

ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण : 15 विधानसभा, 4 लोकसभा सीटों पर सीधा असर
अब तक पार्षद चुनाव चुनते थे इसलिए इनका लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर असर नहीं पड़ता था। 2013 में न तो भाजपा का कोई मेयर जीता था और पार्षद नाममात्र के थे। लेकिन लोकसभा व विधानसभा दोनों में भाजपा जीती थी। इस बार सीधे चुनाव ने रुख स्पष्ट कर दिया है कि वो किस तरफ जा रहे हैं। इसलिए इसका इन चुनाव पर असर पड़ सकता है। इससे चुनावी निगम क्षेत्र से लगने वाली 15 विधानसभा और 4 लोकसभा सीटों पर फायदा मिल सकता है।
बड़े नेताओं के वार्डों का हाल
भूपेंद्र सिंह हुड्डा : रोहतक के जिस वार्ड-14 में पूर्व सीएम हुड्डा का घर है, वहां भी भाजपा प्रत्याशी जीती हैं।
दुष्यंत चौटाला व सावित्री जिंदल : हिसार में इनके वार्ड-13 से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की जीत।
कुलदीप बिश्नोई : हिसार के वार्ड-18 में कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई का मकान है। यहां भाजपा जीती है।
3 पार्टियां साथ फिर भी मात : करनाल में भाजपा को हराने के लिए इनेलो-बसपा समर्थित आशा वधवा को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया, लेकिन जीत भाजपा की हुई। सीएम के वार्ड व विधानसभा क्षेत्र में पार्टी जीती है।
गांवों में भी भाजपा : यमुनानगर के वार्ड 12, 18 व 19 ग्रामीण क्षेत्र में हैं। यहां अधिकतर जाट वोटर हैं। यहां से भाजपा के पार्षद जीते हैं। ऐसे ही करनाल-पानीपत के ग्रामीण क्षेत्र में भी भाजपा को जीत मिली है।