शिक्षक होंगे नहीं, पीएचडी कराएगा विश्वविद्यालय

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में पीएचडी के दरवाजे खुलने के बाद भी शोधार्थियों के लिए मुश्किलें कम नहीं होंगी। शोधार्थी परीक्षा पास कर लेंगे, लेकिन उनके पास गाइड नहीं होंगे। पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के बाद कई विषयों में गाइड इतने कम होंगे कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के हाथ से शोध का मौका छूट जाएगा। क्योंकि विवि के बड़ी संख्या में शिक्षक पीएचडी कराने के लिए आगे ही नहीं आए हैं।
बता दें विवि ने पिछले दिनों यूजीसी के रेग्यूलेशन को लागू करने के बाद पीएचडी के लिए रास्ते खोल दिए थे। पीएचडी कराने की प्रक्रिया के पहले चरण में शिक्षकों से गाइड/सुपरवाइजर बनने के लिए आवेदन मांगे गए। विवि ने नए नियमों की जानकारी देते हुए शिक्षकों से अपने आवेदन और वर्तमान में पीएचडी, रिसर्च की स्थिति के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। विवि ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया, लेकिन विवि और कॉलेजों में नए नियमों के अनुसार पीएचडी कराने योग्य शिक्षकों में से आधे भी आगे नहीं आए। ऐसे में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के बाद शोधर्थियों के सामने गाइड खोजना बड़ी परेशानी बन सकता है। साथ ही हर सीट के लिए बड़ी मारामारी की स्थिति बन सकती है। क्योंकि शोधार्थियों के अनुपात में गाइड की नहीं होंगे।

विवि ने शिक्षकों से पीएचडी गाइड बनने के लिए डाटा मांगा था। नियमों के अनुसार पात्र शिक्षक आवेदन कर सकते थे। इसमें उन शिक्षकों को भी आवेदन करना था, जो वर्तमान में पीएचडी करा रहे हैं। विवि में शिक्षकों की संख्या के अनुपात में आवेदन कम आए हैं।
डॉ. संजीव कुमार, एंट्रेंस कोऑर्डिनेटर

1 हजार से ज्यादा है एमफिल अभ्यर्थी
पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया पिछले नौ साल से फंसे होने के कारण से सबसे ज्यादा मुसीबत विवि से हर साल एमफिल करने वाले सौ से अधिक छात्रों को हुई। क्योंकि सालों से वह पात्र होने के बाद भी अपने ही विवि से पीएचडी में एनरॉल नहीं हो पा रहे थे। पिछले नौ साल में पीएचडी में पंजीकरण के लिए विवि के अभ्यर्थियों की संख्या की एक हजार पार पहुंच गयी है। वहीं नेट में सफल अभ्यर्थी भी लाइन में लगे हुए हैं। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पात्र अभ्यर्थियों की संख्या सैकड़ों में है। जबकि उस अनुपात में गाइड नहीं हैं।

शिक्षकों ने पीएचडी कराने से कर दिया था इंकार
2012 की प्रवेश प्रक्रिया के जरीए पीएचडी की टिकट पाने वाले शोधार्थियों की मुश्किलें पिछले साल बढ़ गयी थी। विवि में कोर्स वर्क पूरा करने वाले 30 से अधिक शोधार्थियों को पीएचडी कराने से लगभग दो दर्जन शिक्षकों ने इंकार कर दिया था। इसके बाद विवि के लिए हालात किसी मुसीबत जैसे हो गए थे। वहीं इस बार आवेदन के दौरान ही शिक्षकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

यह है 2017 में शुरू हुई पीएचडी की स्थिति
409 अभ्यर्थियों को अलॉट किए गए थे गाइड/सुरपरवाइजर
60 से अधिक शोधार्थी कर रहे हैं आवासीय संस्थानों में कार्य
150 से अधिक शिक्षक वर्तमान से करा रहे हैं पीएचडी

यह है स्थिति
12 सौ से अधिक शिक्षक है विवि और एडेड कॉलेजों में
6 सौ से अधिक शिक्षक हैं पीएचडी कराने के लिए पात्र
280 से अधिक विवि, कॉलेजों के शिक्षकों के हैं आवेदन