नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जल्द मकान मिलने का रास्ता साफ, समिति ने कहा- पुरानी कीमत पर ही मिले घर

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे पर रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के जल्द पूरा होने और ग्राहकों को मकान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यूपी सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने इन्हें तीन साल में पूरे करने की सिफारिश की है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा के नेतृत्व वाली समिति ने कुल दस प्रमुख सिफारिशें की हैं। इनमें कहा गया है कि फ्लैट खरीदारों को तय पुरानी कीमतों पर ही फ्लैट दिए जाएं। परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बैंंकों से यथासंभव धन उपलब्ध कराया जाए। बिल्डर इस बात की लिखित गारंटी दें कि परियोजनाओं को निधार्रित समय में पूरा कर लिया जाएगा।

समिति ने प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) के तहत तीन साल में परियोजनाओं को पूरा करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर पीएसपी के सारे लाभ खरीदार को मिलेंगे और बकाए को डेवलपर से वसूला जाएगा। समिति ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से सहायता कोष बनाने का भी अनुरोध किया है, जिससे योजनाओं के लिए धन दिया जा सकेगा।

मकान खरीदारों पर बोझ नहीं बढ़ेगा

केंद्रीय आवास व शहरी विकास मंत्रालय ने कहा है कि सोशल मीडिया पर समिति की सिफारिशों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा था। कहा जा रहा था कि समिति की सिफारिशें बिल्डरों के पक्ष में हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि सारे सुझाव खरीदारों की समस्याओं को देखते हुए उनके हक में ही दिए गए हैं। इनसे खरीदारों पर कोई अतिक्ति बोझ नहीं आने वाला है।

सुझावों पर अमल शुरू

उत्तर प्रदेश सरकार के 18 जून के आदेश के आधार पर इस समिति का गठन किया गया है। समिति को खरीदारों की पहचान करने और उनसे निपटने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति की सिफारिशों पर अमल भी शुरू हो गया है।

नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाए

समिति ने सुझाव दिया है कि गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद तथा आसपास के क्षेत्रों के लिए एक भू संपदा नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाए। मकान खरीदारों पर वित्तीय भार डाले बगैर परियोजनाओं को पूरा किया जाए

खरीदारों-बिल्डर से चर्चा के बाद सिफारिश

समिति ने खरीदारों, डेवलपरों, बैंकों, प्राधिकरण प्रशासन और अन्य सभी पक्षकारों से गहन विचार विमर्श के बाद सुझाव दिया है। समिति की सिफारिशों पर अमल भी शुरू हो गया है।