अयोध्या में राम मंदिर बनना मुस्लिम विरुद्ध नहीं: भैय्या जी जोशी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह भैय्या जी जोशी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनना किसी भी तरह से मुस्लिम विरुद्ध नहीं है। मंदिर भव्य बनना चाहिए। संघ का उद्देश्य हिन्दुओं में भाव जगाना है। देश के लोग राष्ट्रीयता से ओतप्रोत हों। इससे अच्छा कुछ भी नहीं हो सकता है। वह सोमवार को आगरा कॉलेज मैदान पर चयनित व्यवसायी स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब कार सेवक कार सेवा के लिए अयोध्या जा रहे थे तो मुस्लिम समाज के लोगों ने उन पर पत्थर नहीं बरसाए। कार सेवक रामजन्मभूमि तक आराम से पहुंच गए। यदि वहां भव्य मंदिर बनता है तो मुस्लिमों को क्या नुकसान होगा। लगभग 40 मिनट के उद्बोधन में उन्होंने कहा कि संघ का काम हिन्दुओं में भाव जगाना है। हिन्दू एक नहीं, सब हैं। जो हिन्दुओं में भेद करते हैं, उनका भाव खराब है। जिस तरह से गंगा शुद्ध होनी चाहिए, ऐसा लोगों में भाव रहता है। उसी तरह से राष्ट्रीयता के लिए भी ऐसा ही भाव होना चाहिए।

गाय का दर्जा सभी समाजों में एक जैसा हो
गोवंश के बारे में भैय्या जी जोशी ने कहा कि गाय किसी के साथ भेदभाव नहीं करती है। उसे सभी समाजों में एक जैसा दर्जा मिलना चाहिए। गाय का दूध पीने में चाहें वह हिन्दू हो या मुस्लिम हो, बराबर का असर करता है। गाय ये नहीं देखती कि उसका दूध कौन पी रहा है। इस कार्यक्रम में विभाग संचालक हरिशंकर, ब्रज प्रांत संचालक जगदीश वशिष्ठ भी मौजूद रहे।

सेवाभाव के लिए किया प्रेरित
सर कार्यवाह ने स्वयंसेवकों को सेवा भाव के कार्यों को करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक समाज में नई चेतना जागृत करने के लिए सक्षम है। इसलिए स्वयंसेवकों को इस दिशा में अच्छा और मन से कार्य करना चाहिए।  आत्मसम्मान भी जरूरी है। इसलिए स्वयंसेवकों को आत्मसम्मान के लिए जागरूक रहना चाहिए।

संघ की शाखाओं का विस्तार कर लोगों को जोड़ें
सर कार्यवाह ने कहा कि संघ की शाखाओं का और विस्तार किए जाने की जरूरत है। इस दिशा में भी काम होना चाहिए। स्वयंसेवकों को आम लोगों के साथ जुड़कर शाखाओं में उनकी संख्या बढ़ानी चाहिए। स्वयंसेवकों को समाज की हर गतिविधि पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही उन्हें सामाजिक सरोकारों के लिए घर-घर जाकर संदेश देने का भी काम करना चाहिए।

संघ के कार्यों की अलग है पहचान
सर कार्यवाह ने कहा कि संघ के कार्य करने का तरीका सबसे अलग होने के कारण ही इसकी पहचान है। दैनिक शाखा देखकर स्पोर्ट्स क्लब और पथ संचलन को देख कर अर्धसैनिक बल जैसा सामाजिक संगठन दिखता है। वहीं कुछ लोगों को राजनैतिक संगठन दिखता है। संघ की स्थापना के समय डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि यदि वामपंथी या मुस्लिम नहीं भी होते तो भी संघ की स्थापना वह अवश्य करते। उन्होंने कहा कि हिंदू शक्तिशाली होना किसी की प्रतिक्रिया स्वरूप नहीं है, वरन इसलिए है कि हम सशक्त रहेंगे तो हिम्मत के साथ खड़े होंगे। हिंदू समाज को सामर्थ्यवान बनाने में जो बाधाएं आएंगी, उन्हें दूर कर सकेंगे। जातिभेद भाषा या प्रांत भेद ऐसी बाधाएं हैं, जिन्हें दूर करना है।

सज्जन व्यक्ति शक्ति रूप में, उठ खड़े हों 
उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में संस्कारों की आवश्यकता होती है। वाणी में मधुरता जरूरी है। संगठित होने के बाद संस्कार ही नहीं, इसके लिए सज्जन बनना और उसके बाद विवेकशील बनना आवश्यक है। विवेकशील बनने के बाद सही गलत के बारे में समाज को बताना भी जरूरी है। सज्जन व्यक्ति शक्ति के रूप में होता है। इनको आगे आकर समाज को बदलने के लिए कार्य करना होगा।