CBI का एक और अफसर पहुंचा SC, अस्थाना के खिलाफ SIT जांच की मांग

केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अंदरूनी घमासान में एक और अधिकारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने अपने ट्रांसफर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी ने अपना तबादला नागपुर किए जाने के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है.

याचिका में सिन्हा ने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज FIR पर SIT जांच की मांग की है.

भ्रष्टाचार के कथित मामले में अस्थाना की भूमिका की जांच कर रही टीम का हिस्सा रहे आईपीएस अधिकारी मनीष कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अविलंब सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी याचिका का उल्लेख किया. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ भी शामिल हैं.

गौरतलब है कि यह पीठ अधिकार छीनने और अवकाश पर भेजने संबंधी सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की याचिका पर कल (मंगलवार) सुनवाई करने वाली है. सिन्हा ने कहा कि उनकी अर्जी पर भी कल ही वर्मा की याचिका के साथ ही सुनवाई की जाए.

सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उनका तबादला नागपुर कर दिया गया है और इस वजह से वह अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच से बाहर हो गए हैं

डीआईजी सिन्हा ने अपनी याचिका में इस मसले पर जल्द सुनवाई की मांग की थी. हालांकि, कोर्ट ने उनकी इस मांग को ठुकराते हुए जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि आपकी याचिका लिस्ट नहीं होगी, लेकिन मंगलवार की सुनवाई में आप मौजूद रहें.

अश्विनी गुप्ता भी पहुंचे हैं कोर्ट

पुलिस उपाधीक्षक अश्विनी कुमार गुप्ता भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें, उनके मूल संगठन आईबी में लौटाया जा रहा है क्योंकि वह सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रहे थे. अस्थाना को सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा के साथ छुट्टी पर भेज दिया गया था और उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से वंचित कर दिया गया है.

गुप्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि वह जनवरी 1999 में आईबी में शामिल हुए थे और जुलाई 2014 में प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में नियुक्त किए गए थे. शुरू में उनकी नियुक्ति तीन साल तक, जून 2017 तक के लिए हुई थी. बाद में, उन्हें उनके मूल विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) पर जून 2018 तक का सेवा विस्तार दिया गया. उसके बाद फिर एक साल के लिए जून 2019 तक सेवा विस्तार दिया गया.

अधिकारी ने दावा किया कि आश्चर्यजनक रूप से 24 अक्टूबर की सुबह सीबीआई द्वारा उन्हें उनके मूल संगठन को इस आधार पर लौटा दिया गया कि उनके सेवा विस्तार का आदेश सीबीआई को नहीं मिला है.

गुप्ता ने कहा, ‘वास्तविकता यह है कि सीबीआई को आईबी से एनओसी जून 2018 में, आवेदक की प्रतिनियुक्ति का समयकाल पूरा होने से पहले मिल गया था और उसी महीने डीओपीटी को उसकी स्वीकृति के लिए भेज दिया गया था.’