रामायण में निभाया हनुमान का रोल, पहलवानी में जीते सभी 500 मैच

पहलवानी में देश को नई बुलंदियों तक पहुंचाने वाले दारा सिंह का करियर शानदार रहा. कुश्ती से लेकर सिनेमा तक उन्होंने अपना जलवा बनाया. दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब के एक गांव में हुआ था. साल 1947 में दारा सिंह सिंगापुर चले गए थे और वहां उन्होंने एक ड्रम बनाने की मिल में काम किया था और तभी उन्होंने हरनाम सिंह से कुश्ती की ट्रेनिंग लेनी शुरू की.

दारा सिंह ने अपने करियर में करीब 500 प्रोफेशनल कुश्तियां लड़ी और सारी जीतीं. 1968 में दारा सिंह ने फ्रीस्टाइल कुश्ती के अमेरिकी चैंपियन लाऊ थेज को हराया और इसके साथ ही वो वर्ल्ड चैंपियन भी बन गए. 1983 में उन्होंने कुश्ती को अलविदा कहा. इसके अलावा दारा सिंह ने 100 से ज्यादा फिल्मों में भी काम किया.

सिंगापुर में उन्होंने तारलोक सिंह को हराकर चैंपियन ऑफ मलेशिया का खिताब जीता. दारा सिंह हमेशा से ही लंबे चौड़े थे. उनकी लंबाई 6 फुट 2 इंच थी और उनका वजन लगभग 127 किलोग्राम था. साल 1954 में 26 साल की उम्र में ही वो नेशनल रेस्लिंग चैंपियन बने. अपनी कुश्ती के लिए उन्हें दुनियाभर से सम्मान मिला. साल 1959 में किंग कॉन्ग, जॉर्ज गोडिएनको और जॉन डेसिलवा को हराकर वो कॉमनवेल्थ चैंपियन बने.

किंग कॉन्ग के साथ हुआ उनका मुकाबला बहुत हैरान करने वाला था. किंग कॉन्ग 200 किलो के थे और दारा सिंह लगभग 130 किलो के और उस मुकाबले में दारा सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के इस खिलाड़ी को सिर पर उठाकर घुमाया और फेंक दिया. इसे देखकर हर कोई हैरान रह गया था.

दारा सिंह ने दो शादियां की थीं और उनके 6 बच्चे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दारा सिंह नाबालिग थे तभी पिता बन गए थे. कहा जाता है कि 17 साल की उम्र में दारा सिंह पिता बने थे.

ऐतिहासिक रामायण में उन्होंने पवन पुत्र हनुमान का रोल प्ले किया और सभी के मन-मस्तिष्क में अपनी एक खास छवि स्थापित की. इसके अलावा उन्होंने आंखों-आंखों में, धर्मात्मा, मर्द, कर्मा और दुल्हन हम ले जाएंगे जैसी फिल्मों में काम किया.

7 जुलाई 2012 को दारा सिंह को हार्ट अटैक के बाद मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां 12 जुलाई 2012 को उनका देहांत हो गया.