RBI बोर्ड की बैठक शुरू, क्या सरकार से विवाद का निकलेगा हल?

केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच जारी गतिरोध के बीच आज बैंक के बोर्ड की मीटिंग हो रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में वित्त मंत्रालय और आरबीआई के बीच अहम बिंदुओं पर सहमति बन सकती है. मुंबई में ये बैठक शुरू हो गई है.

सरकार और रिजर्व बैंक के बीच कथित तनातनी लंबे वक्त से देखने को मिल रही है, जिसके बीच आज बैंक के निदेशक मंडल की बैठक हो रही है. इससे पहले सरकार और बैंक की तरफ से टिप्पणी की जाती रही हैं. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य अपनी टिप्पणी में कह चुके हैं कि सरकारें जो अपने केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करतीं, उन्हें जल्दी या देरी में वित्तीय बाजार की नाराजगी का सामना करना होगा. वहीं दूसरी तरफ आरबीआई गवर्नर इस घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुके हैं.

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, इस बैठक में वित्त मंत्रालय के नामित निदेशक और कुछ स्वतंत्र निदेशक गवर्नर उर्जित पटेल और उनकी टीम पर एमएसएमई (MSME) को कर्ज से लेकर केन्द्रीय बैंक के पास उपलब्ध कोष को लेकर अपनी बात रख सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक, सरकार और रिजर्व बैंक बैंकों में त्वरित सुधारात्मक उपायों (पीसीए) की रूपरेखा तथा एमएसएमई क्षेत्र को ऋण देने के प्रावधानों में ढील को लेकर आपसी सहमति से किसी समाधान पर पहुंचने की भी संभावना है.  इसके अलावा एनबीएफसी के लिए स्पेशल विंडो का मुद्दा भी इस बैठक का हिस्सा बन सकता है.

आरबीआई बोर्ड में 18 सदस्य

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में 18 सदस्य हैं. हालांकि, इसमें सदस्यों की संख्या 21 तक रखने का प्रावधान है.

सदस्यों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार अन्य डिप्टी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक निदेशक हैं. इनके अलावा अन्य 13 सदस्य सरकार द्वारा नामित हैं. सरकार द्वारा नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के दो अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं.

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार रिजर्व बैंक के भंडार को हथियाने के लिए उसके ऊपर कब्जा करने का इरादा बना चुकी है. चिदंबरम ने कहा, ‘दुनिया में कहीं भी केंद्रीय बैंक, उसके निदेशक मंडल द्वारा प्रबंधित कंपनी नहीं है. यह सुझाव देना कि निजी कंपनियों के लोग गवर्नर को निर्देश देंगे, हास्यास्पद है.’

बता दें कि रिजर्व बैंक के पास 9.59 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कोष है. आरोप लग रहे हैं कि सरकार इस कोष का एक हिस्सा लेना चाहती है. इसके अलावा दूसरे कई मसलों पर भी टकराव की स्थिति के दावे किए जा रहे हैं.