नाथूराम गोडसे के अलावा कोई और भी था गांधी का हत्यारा?

15 नवंबर 1949 को राष्ट्रपति महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी पर लटकाया गया था. नाथूराम गोडसे समेत आठ लोगों को बापू की मौत की साजिश का दोषी पाया गया, जिसमें 2 को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. आइए जानते हैं नाथूराम गोडसे से जुड़ी कई अन्य बातें…

गोडसे का जन्म एक मराठी परिवार में हुआ था और हाईस्कूल के बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन उसने कई धार्मिक किताबों का गहरा अध्ययन किया था.

शुरुआत में गोडसे आरएसएस में शामिल हो गया था और बाद में वो आरएसएस से अलग हो गया था. 1947 विभाजन में हुई सांप्रदायिक हिंसा ने उस पर गहरा असर डाला था. हालांकि गोडसे के परिवार का कहना है कि गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कट्टर सदस्य था. परिवार ने ये भी कहा कि संघ ने गोडसे को न तो कभी निकाला था और न वो आरएसएस से अलग हुए थे.

बता दें कि 30 जनवरी 1948 को नाथुराम गोडसे ने सेमी-ऑटोमेटिक बेर्टा पिस्टल से बिरला हाऊस में बापू को तीन गोलियां मारी थीं. इससे पहले उन्होंने दिल्ली रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रची, लेकिन बाद में वो इससे पीछे हट गए. बापू की हत्या को लेकर 8 महीने कोर्ट ट्रायल चला और इसमें 149 चश्मदीद गवाह और अन्य गवाह शामिल रहे.

हालांकि महात्मा गांधी की मौत को लेकर कई दावे किए जाते हैं. पुलिस के अनुसार गोडसे ने तीन गोलियां चलाई थीं और बापू को मार दिया था. हालांकि यह भी कहा जाता है कि उन्हें चार गोलियां मारी गई थीं, तो यह सवाल खड़े होते हैं कि वो चौथी गोली किसने चलाई थी?

गांधी जी की हत्या के बाद जब उन्हें जेल में बंद किया गया था, तो उन्होंने गांधी की हत्या की वजह राजनीतिक कारण बताया था. साथ ही कहा जाता है कि गोडसे गांधी की विचारधारा से नफरत करता था और उसके गांधी पर कई आरोप थे.

गोडसे मोहम्मद अली जिन्ना की अलगाववादी विचारधारा का विरोध करता था. शुरू में उसने गांधी के कार्यक्रमों का समर्थन किया. बाद में हिंदुओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीति अपनाए जाने को लेकर वह बापू का प्रबल विरोधी हो गया था.

नाथूराम ने गांधी की अंतिम भूख हड़ताल पर भी सवाल उठाए थे, जिसमें गांधी जी ने पाकिस्तान को फंड जारी करने से भारत के इनकार करने पर विरोध पर किया था.