चंद्रयान-1 मिशन का डंका, जानें क्या है चंद्रयान-2 की तैयारी

नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्षयान चंद्रयान-1 के आंकड़ों के आधार पर चंद्रमा पर बर्फ होने की पुष्टि की है. भारत ने 10 साल पहले इस अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण किया था.

इन आंकड़ों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि आगे के अभियानों में चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी खोजने पर जोर रहेगा ताकि वहां जीवन की संभावनाओं को पुख्ता किया जा सके. भारत का चांद पर अगला मिशन यानी चंद्रयान-2 मिशन 2019 में ही पृथ्वी से रवाना हो सकेगा. पहले इसे इसी साल अंतरिक्ष में जाना था, लेकिन अब इसके डिजाइन में कुछ बदलाव किए जाने हैं ताकि यह आसानी से चंद्रमा पर उतर सके.

चंद्रयान-2 को 3 जनवरी को लॉन्च किया जा सकता है. हालांकि यह तारीख मार्च तक भी आगे खिसक सकती है. चंद्रयान-2 के भार में 600 किलोग्राम की बढ़ोतरी भी की गई है. दरअसल, प्रयोगों के दौरान पता चला था कि उपग्रह से जब चंद्रमा पर उतरने वाला हिस्सा बाहर निकलेगा तो उपग्रह हिलने लगेगा. इसलिए इसके डिजाइन में सुधार और वजन बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई.

इसरो के प्रमुख के. सिवन का कहना है, ‘उपग्रह को अधिक चक्कर लगाने की जरूरत है, जिसमें अधिक ईंधन की जरूरत होगी.’ इसरो के आगामी मिशन के बारे में सिवन ने बताया कि अगले तीन सालों में इसरो की योजना 50 से ज्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने की है. उन्होंने बताया कि इसरो 2019 में 22 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा. इसरो द्वारा एक साल में प्रक्षेपित किए गए यह अधिकतम उपग्रह की संख्या है.

इसरो के लिए साल 2018 भी काफी व्यस्त रहने वाला है. इसे हर महीने कम से कम 2 उपग्रह प्रक्षेपित करने हैं. उन्होंने कहा कि इसको का अगला मिशन पीएसएलवी C42 है जो NOVASAT और S1-4 को लॉन्च करेगा.

सिवन ने बताया कि इसरो इस साल अक्टूबर में डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के जीएसएटी 29 उपग्रह सहित 30 कारोबारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा. इसरो प्रमुख से जब जीएसएटी 6ए (इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया है) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसरो ने अब भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है और हम अब भी इस उपग्रह के साथ रडार संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हम अभी एक साल और इसका इंतजार करेंगे और इसके बाद ही इसके विफल होने की घोषणा करेंगे.

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