दीपों का ये त्योहार, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस नाम से पहचाना जाता है 

श्रीलंका में दिवाली
भगवान राम के हाथों रावण के वध के बाद विभीषण को लंका का राजा बनाया गया। विभीषण ने रावण वध के बाद लंका वासियों को बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य में दीपोत्सव मनाने का आदेश दिया। जिसके बाद से श्रीलंका में अमावस्या के दिन दीपक जलाए जाते हैं।

जापान में ओनियो फायर फेस्टिवल
जापान में ओनियो फायर नाम से एक फेस्टिवल मनाया जाता है।माना जाता है कि एक सप्ताह तक चलने वाला यह त्योहार बुरी आत्माओं को भगाने के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार में 6 बड़े फायर टॉर्च जलाए जाते हैं। बता दें, यह त्योहार फुकुओका समेत यहां के कई शहरों में जनवरी महीने की शुरुआत में मनाया जाता है।

म्यांमार में थैडिंगयुट फेस्टिवल
म्यांमार में दीपों का यह त्योहार तीन दिन तक मनाया जाता है।जिसे लाइटिंग फेस्टिवल ऑफ म्यांमार के नाम से पुकारा जाता है।हर साल अक्टूबर में यह त्योहार भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के स्वागत के लिए मनाया जाता है।लोग इस दिन अपने घरों को लाइट्स से सजाते हैं।

इंग्लैंड में ऑटरी सेंट मैरी फेस्ट
हर साल 5 नवंबर को इंग्लैंड के ऑटरी सेंट मैरी शहर में एक फेस्ट होता है। इस फेस्ट का मुख्य आकर्षण आतिशबाजी होती है।खास बात यह है कि इस फेस्ट की शुरुआत 1605 में हुई थी।

स्पेन में फालेस
स्पेन में मार्च महीने में फालेस फायर फेस्टिवल मनाया जाता है। जो कि पूरे 5 दिन तक चलता है। लोग इस फेस्टिवल में आतिशबाजी से जुड़े कई करतब दिखाते हैं।

ईरान में सादेह
करीब 5 दशक से इस फेस्टिवल को ईरान में मनाने की परंपरा है।इस त्योहार को अंधकार और सर्दी पर जीत तथा अग्नि के सम्मान में हर साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में सादेह के नाम से मनाया जाता है।