सीबीआई में कब, कैसे और क्यों मचा बवाल?

रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरी देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई में दो शीर्ष अफसरों का घमासान अदालत तक पहुंच गया है. जांच एजेंसी के ताजा हालात के कारण भ्रष्टाचार के कई केस पर असर पड़ना तय है. मोदी सरकार भी इस विवाद के बाद मुश्किल में फंस गई है. आइए जानते हैं आखिर यह विवाद कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ…

यह विवाद सीबीआई के दो आला अफसर आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच शुरू हुआ. दरअसल, 1979 बैच के आईपीएस अफसर आलोक वर्मा 1 फरवरी, 2017 को सीबीआई चीफ बनाए गए. कुछ समय बाद मोदी सरकार ने 1984 बैच गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर बना दिया.

इसके बाद आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच तकरार अक्टूबर 2017 में सामने तब आई जब वर्मा ने CVC के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किये जाने पर आपत्ति जताई.

वर्मा का कहना था कि अधिकारियों के इंडक्शन को लेकर उनके द्वारा की गई सिफारिश को अस्थाना ने बिगाड़ दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका के कारण सीबीआई भी घेरे में आ गई.
हालांकि, वर्मा की आपत्तियों को पैनल ने खारिज कर दिया और अस्थाना को प्रमोट कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्थाना को क्लीन चिट दी.

फिर यह तकरार तब और बढ़ गई जब जुलाई में cvc ने सीबीआई में प्रमोशन को लेकर चर्चा करने अस्थाना को एजेंसी में नंबर 2 की हैसियत में बुलाया गया. जब यह बात वर्मा को पता लगी तो उन्होंने cvc को लिखा कि उन्होंने अपनी तरफ से मीटिंग में शामिल होने के लिए अस्थाना को अधिकृत नहीं किया है.

24 अगस्त को अस्थाना ने cvc और कैबिनेट सेक्रेटरी को वर्मा और उनके करीबी एके शर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की डिटेल दी. उन्होंने दावा किया कि सना ने वर्मा को दो करोड़ रुपये इसलिए दिए ताकि वह मोइन कुरैशी केस में बच सके.

पिछले हफ्ते अस्थाना ने फिर cvc और कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा वह सना की गिरफ्तारी चाहते हैं, लेकिन वर्मा ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. अस्थाना ने दावा किया कि फरवरी में उन्होंने सना से पूछताछ की थी तो वर्मा ने उन्हें फोन कर रोक दिया. फिर आलोक वर्मा ने राकेश अस्थाना से कई महत्वपूर्ण मामले वापस लेकर ए. के शर्मा को सौंप दिए. अस्थाना के स्टाफ का भी तबादला कर दिया गया.

4 अक्टूबर को CBI ने सना को पकड़ा और उसे मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपये दे दिए. फिर 15 अक्टूबर को सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ घूस लेने का आरोप दर्ज किया.